टीकमगढ़ (प्रीति मिनी खरे ) । थाना कुड़ीला क्षेत्र के मालगुवां गाँव
में हाल ही में हुई सवारी ऑटो दुर्घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि
हमारे यातायात तंत्र की गंभीर खामियों और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक है।
एक छोटे सवारी ऑटो में 15 लोगों का बैठना और उसका अनियंत्रित होकर पलट
जाना यह दर्शाता है कि नियमों का पालन किस हद तक नजरअंदाज किया जा रहा है।
दुर्घटना
के बाद डायल-112 की टीम द्वारा त्वरित राहत कार्य निश्चित रूप से सराहनीय
है। जवानों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को अस्पताल पहुँचाया, जिससे समय
पर उपचार संभव हो सका। लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण प्रश्न है कि क्या
हमारी जिम्मेदारी केवल हादसे के बाद राहत और बचाव तक सीमित रह गई है?
वास्तविकता
यह है कि सवारी वाहनों में ओवरलोडिंग अब एक आम और खतरनाक प्रवृत्ति बन
चुकी है। ऑटो, टेम्पो और अन्य छोटे वाहनों में क्षमता से कई गुना अधिक
यात्रियों को बैठाना खुलेआम नियमों का उल्लंघन है। यह न केवल यातायात
कानूनों की अवहेलना है, बल्कि सीधे तौर पर यात्रियों की जान को जोखिम में
डालने जैसा है।
यातायात विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से इस समस्या पर लगातार और सख्त कार्रवाई का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यदि समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाए जाएं, ओवरलोडिंग करने वाले वाहन चालकों पर कड़ी कार्रवाई हो, और भारी जुर्माने के साथ लाइसेंस निरस्तीकरण जैसे कदम उठाए जाएं, तो ऐसी घटनाओं में निश्चित रूप से कमी लाई जा सकती है।
यह दुर्घटना एक चेतावनी है—प्रशासन के लिए भी और आम नागरिकों के लिए भी। सड़क सुरक्षा केवल नियमों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति के जीवन से जुड़ा हुआ मुद्दा है। यदि अब भी इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया, तो हर अगला हादसा केवल एक और संख्या बनकर रह जाएगा।

