टीकमगढ़, मध्य प्रदेश | रात का सन्नाटा, बजती एक धुन और अचानक चीखों में तब्दील हुई खुशियाँ। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ (Tikamgarh) जिले से एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। देहात थाना क्षेत्र की भगतनगर कॉलोनी में महज़ गाना बजाने को लेकर दो पक्षों में ऐसी ठनी कि बात सीधे कत्ल पर जाकर रुकी। एक 23 साल के युवक राजेंद्र बंशकार को बीच सड़क पर तलवार से काट डाला गया। हालांकि, इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात के बाद मुस्तैद पुलिस ने महज़ 24 घंटे के भीतर हत्यारे कैलाश अहिरवार को दबोचकर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
पल भर का गुस्सा और चीखों में बदला उत्सव
यह खूनी ड्रामा 13-14 अक्टूबर की दरमियानी रात को शुरू हुआ। राजेंद्र बंशकार कॉलोनी में मौजूद था। इसी दौरान अपनी पसंद का गाना बजाने और उसकी आवाज़ को लेकर राजेंद्र की बहस वहीं खड़े कैलाश अहिरवार से हो गई। शुरुआत में यह एक मामूली कहासुनी लग रही थी, लेकिन देखते ही देखते कैलाश के सिर पर खून सवार हो गया। वह गुस्से में अंधा होकर अपने घर की तरफ भागा। जब वह वापस लौटा, तो उसके हाथ में मौत का सामान यानी एक भारी लोहे की तलवार थी। इससे पहले कि राजेंद्र को संभलने का मौका मिलता, कैलाश ने सरेराह उस पर तलवार से ताबड़तोड़ वार कर दिए। राजेंद्र खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़ा और मौके पर ही उसकी सांसें थम गईं।
दहशत में डूबा शहर और पुलिस का चक्रव्यूह
इस नृशंस हत्याकांड के बाद पूरी भगतनगर कॉलोनी में सन्नाटा पसर गया और लोग दहशत से सहम गए। वारदात को अंजाम देकर आरोपी कैलाश अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए देहात थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई। पुलिस ने त्वरित टीमें गठित कीं और फरार कातिल को पकड़ने के लिए नाकेबंदी कर दी गई। पुलिस ने मुखबिरों और तकनीकी इनपुट का ऐसा चक्रव्यूह रचा कि वारदात के महज़ 24 घंटे के भीतर आरोपी कैलाश अहिरवार को चारों तरफ से घेरकर गिरफ्तार कर लिया गया।
कातिल की निशानदेही पर मौत का हथियार बरामद
गिरफ्तारी के बाद पुलिसिया पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल की गई खून से सनी लोहे की तलवार को भी बरामद कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या) के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। इस त्वरित कार्रवाई ने कानून व्यवस्था पर जनता का भरोसा तो मजबूत किया है, लेकिन यह गंभीर सवाल छोड़ दिया है कि क्या आज के समाज में किसी की ज़िंदगी की कीमत महज़ एक अदद गाने जितनी रह गई है?
