केवल नीतिगत इरादों (practical solutions ) पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधानों (strategic planning ) पर केंद्रित रहा: केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार

 दिल्ली | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर आज चंडीगढ़ में संपन्न हो गया। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने "अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब – विकसित भारत@2047" विषय के अनुरूप सामाजिक न्याय योजनाओं के देश के प्रत्येक क्षेत्र तक प्रभावी कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने के लिए समयबद्ध और व्यावहारिक अनुशंसाओं के एक समूह पर सहमति व्यक्त की। 


केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने अपने समापन भाषण में कहा कि तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस बात पर सामूहिक रूप से विचार-विमर्श करने के लिए एक गंभीर और परिणाम के अनुकूल मंच प्रदान किया कि सामाजिक न्याय के कार्यान्वयन को कैसे अधिक सुलभ, उत्तरदायी और कार्यान्वयन के अनुकूल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विचार-विमर्श "अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब - विकसित भारत@2047" के व्यापक राष्ट्रीय संकल्प पर आधारित था। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि सामाजिक न्याय का आधार कतार में खड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिए भी गरिमा, सुलभता और निरंतरता होना चाहिए।




    डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि शिविर के दौरान हुई चर्चाएँ व्यापक नीतिगत उद्देश्यों से आगे जाकर छात्रवृत्ति वितरण, नशामुक्ति, वरिष्ठ नागरिक कल्याण, सुलभता, दिव्यांगजनों के लिए प्रमाणन और कमजोर समुदायों के लिए समावेशन-आधारित सहायता प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधानों पर केंद्रित थीं। उद्घाटन सत्र के दौरान शुरू किए गए प्लेटफार्म और अनुप्रयोगों सहित मंत्रालय की वर्तमान में जारी डिजिटल और संस्थागत पहलों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक बिना किसी देरी के पहुँचें। डॉ. वीरेंद्र कुमार ने यह सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी-सक्षम सुशासन, प्रक्रिया सरलीकरण, बेहतर निगरानी और केंद्र तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच मजबूत समन्वय के महत्व पर बल दिया।


    केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि विषयगत भोज, सत्र और समूह प्रस्तुतियों से प्राप्त सिफारिशें सामाजिक न्याय क्षेत्र में अधिक प्रभावी कार्यान्वयन ढांचा तैयार करने में सहायक होंगी। उन्होंने कहा कि मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ घनिष्ठ साझेदारी में चिंतन शिविर के परिणामों को आगे बढ़ाएगा, जिसमें समाज के गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों के लिए समावेशन, सशक्तिकरण और जमीनी स्तर पर मापने योग्य परिणामों पर निरंतर ध्यान दिया जाएगा।
जिसके बाद "जागरूकता से सुलभता - सामाजिक न्याय कार्यक्रम के अंतर्गत सुलभता के प्रति जागरूकता" विषय पर नाश्ते का आयोजन किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने योजना-केंद्रित सोच से हटकर अधिकार-आधारित, सार्वभौमिक डिजाइन दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर चर्चा की, जो सुलभता को सभी सार्वजनिक अवसंरचनाओं, सेवाओं और डिजिटल प्लेटफार्म का अभिन्न अंग मानता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने निरंतर जागरूकता, इंजीनियरों और वास्तुकारों की क्षमता विकास, प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग और निर्मित वातावरण, परिवहन, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक सेवाओं को विकलांग व्यक्तियों सहित सभी के लिए सुलभ बनाने में स्थानीय निकायों की मजबूत भूमिका के महत्व पर बल दिया।

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